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शुक्रवार, 1 दिसंबर 2017
कलिकाल का आगमन
किसी नगर में संदीप नाम का एक राजा राज्य करता था। वो एक कुशल शासक था और उसके राज्य में सभी संतुष्ट थे। संदीप के कुशल शासन का रहस्य उसका महामंत्री था। महामंत्री राज्यभक्त तथा निष्ठावान था। संदीप का उस पर पूरा-पूरा विश्वास था और महामंत्री भी अपनी राष्ट्रभक्ति दिखाने का अवसर नहीं खोता था।
एक बार संदीप शिकार करने के लिए वन में गया जहां उससे गलती से दुर्वास ऋषि की तपस्या भंग हो गई। दुर्वास ने उसे राक्षस हो जाने का शाप दिया। शाप लगते ही संदीप राक्षस बन गया और वन में भाग गया।
संदीप के राक्षस बन जाने से पूरे राज्य पर विपदा का पहाड़ टूट पड़ा। राज्य को संकट से उबारने का दायित्व महामंत्री पर आ गया। महामंत्री ने ठाना कि वो राज्य को इस संकट से उबारेगा भले ही उसके प्राण चले जाएं।
महामंत्री पूरी बात पता कर दुर्वास ऋषि के पास पहुंचा और संदीप की ओर से क्षमा मांगते हुए और राज्य पर संकट की बात बताते हुए उनसे शाप विमोचन करने के लिए कहा। दुर्वास ने कहा कि वो शाप का विमोचन नहीं कर सकते।
महामंत्री ने दुर्वास से प्रार्थना की और उन्हें समझाया। दुर्वास ने कहा कि वो शाप का विमोचन नहीं कर सकते पर यहां से कुछ दूर एक पहाड़ी पर मां भद्रकाली का मंदिर है। मंदिर में स्थापित प्रतिमा बड़ी भयंकर है और भयभीत करने वाली है। वहां जाकर मां को अपनी सबसे प्रिय वस्तु अर्पित कर दो। मां कल्याण करेंगी।
दुर्वास से आज्ञा लेकर महामंत्री मंदिर जा पहुंचा। वास्तव में मंदिर में स्थापित प्रतिमा बड़ी भयंकर थी। मां इस संसार में मुझे सबसे प्रिय मेरे प्राण हैं, क्योंकि जब तक प्राण हैं तब तक ही सभी सुखभोग हैं। इसलिए मां मैं तुम्हें अपना शीश अर्पित करता हूं। यह कहकर वो तलवार लेकर सिर काटने का प्रवृत्त हुआ। तभी आकाशवाणी हुई, महामंत्री मैं प्रसन्न हूं वर मांगो। महामंत्री ने कहा कि हे मां, राजा संदीप राक्षस बन गए हैं। राज्य संकट में है और कहीं कोई मार्ग दिखाई नहीं देता। मार्गदर्शन करें। फिर आकाशवाणी हुई-महामंत्री जाओ और जाकर एक हजार पृष्ठों की एक काल्पिनिक कहानी लिखो और वो कथा जाकर संदीप को सुना दो। वो शाप से मुक्त हो जाएगा।
परंतु मां मैंं कहानी लिखूंगा कैसे? मुझे कहानी लिखना नहीं आता, महामंत्री ने कहा। अब आकाशवाणी हुई- हे महामंत्री जाकर लिखना प्रारंभ करो। सबकुछ स्वत: होता जाएगा।
महामंत्री वापस आ गए और कहानी लिखना शुरू कर दिया। ये ईश्वरेच्छा ही थी कि महामंत्री जो एक बार लिखने बैठे तो स्वत: प्रेरणा से उन्होंने पूरी कथा लिख डाली। अब वो ये कथा की पोथी लेकर संदीप को ढूंढने निकले। शीघ्र ही वन में उनको संदीप भी मिल गया। संदीप उसे देखते ही मारने को दौड़ा। महामंत्री भागे और एक पेड़ के नीचे बैठकर वो पोथी खोलकर कहानी पढऩे लगे। संदीप भी वहां आ पहुंचा। आश्चर्य था कि कथा सुनते ही संदीप जहां था वहीं रुक गया। पूरी कथा समाप्त होते ही वो पुन: मनुष्य बन गया और प्रसन्नतापूर्वक महामंत्री सहित राज्य में वापस लौट आया।
पुन: पदासीन होने के बाद राजा संदीप ने कहा कि महामंत्री ने जो काल्पनिक कथा लिखी थी वो बहुत रोचक थी। इसलिए इस प्रकार की अन्य कथाएं भी लिखी जाएं। राजा का आदेश मिलते ही राज्य में काल्पनिक कहानियों का बोलबाला हो गया। सभी काल्पनिक कहानियां पढ़ते और प्रसन्न होते। लोगों के काल्पनिक कहानियां पढ़ते ही राज्य में पंडितों और विद्वानों की पूछपरख समाप्त हो गई। कोई भी वेद-पुराणादि की कथाएं न सुनता न पढ़ता। पंडितों में असंतोष व्याप्त हो गया। वे सभी दुर्वास ऋषि के पास जा पहुंचे।
दुर्वास ने उन सभी की बात सुनी फिर उन लोगों से कहा- हे ज्ञानी पंडितों आज इसी क्षण से कलियुग का प्रारंभ हो रहा है। अब सभी लोग काल्पनिक कहानियां पढ़ेंगे। मिथ्या को सत्य मानेंगे और वेद-पुराणादि को अनुगमन नहीं करेंगे। इस लिए अब तुम्हारी पूछपरख नहीं होगी। ऐसा कहकर ऋषि दुर्वास आकाशमार्ग से आए यान में बैठकर चले गए और निराश पंडित-विद्वान घरों को लौट आए।
दुर्वास की कही बातें सत्य साबित हुईं। आज लोग कॉमिक्स और दूसरी कल्पनाओं पर आधारित किताबें पढ़ते हैं और बहुत हद तक कल्पना को ही सत्य मान लेते हैं। धर्म पर उनकी आस्था कम हो रही है और वो स्वयं ही अपने धर्म और कर्म के नियंता बन बैठे हैं। ऐसा कहा जा सकता है कि महामंत्री द्वारा लिखी वो किताब विश्व की सबसे पहली कॉमिक्स यानी की कपोल कल्पित कथा थी।
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